Sunday, October 28, 2018

बस्ती जिला

बस्ती जिला 
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प्रमुख स्थल
अमोढ़ा, छावनी बाजार, संत रविदास वन विहार, भद्रेश्‍वर नाथ, मखौडा, श्रंगीनारी, गणेशपुर, धिरौली बाबू, केवाड़ी मुस्तहकम, नागर, चंदू ताल, बराहक्षेत्र, अगौना, पकरी भीखी आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से है।

अमोढ़ा: अमोढ़ा जिला मुख्यालय से 41 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह पुराने दिनों में राजा जालिम सिंह का राज्य था। इसके अलावा राजा जालिम सिंह के महल यहाँ है, महल की पुरानी दीवार अंग्रेज द्वारा इस्तेमाल के लिए गोली के निशान के साथ अभी भी वहाँ है। इसके अलावा एक प्रसिद्ध मंदिर (रामरेखा मन्दिर) यहाँ है। रामरेखा मन्दिर भगवान राम और सीता देवी के सबसे प्राचीन हिंदू मंदिर में से एक है। भगवान श्री राम जनकपुर-अयोध्या की अपनी यात्रा के दौरान एक दिन के लिए यहाँ रुके थे। उसके बाद भगवान श्री राम और लक्ष्मण के साथ सीता राम जानकी मार्ग ( SH-72) छावनी पास सड़क मार्ग से अयोध्या की ओर कूच किया।

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद जी ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उनके पूर्वज संयुक्त प्रांत के अमोढा से गये थे।

उन्होंने अपनी आत्मकथा के शुरूआत में अपने पूर्वजों के बारे में लिखा है-

संयुक्त प्रांत में कोई जगह अमोढ़ा नाम की है। सुनते हैं कि वहाँ कायस्थों की अच्छी बस्ती है। बहुत दिन बीते वहाँ से एक परिवार निकलकर पूरब चला और बलिया में जाकर बसा। एक बड़े जमाने तक बलिया में रहने के बाद उस परिवार की एक शाखा उत्तर की ओर गई और आजकल के जिला सारन (बिहार) के जीरादेई गाँव में जाकर रहने लगी। दूसरी शाखा गया में जाकर बस गई। जीरादेई–शाखा के कुछ लोग थोड़ी ही दूर पर एक दूसरे गाँव में भी जाकर बस गए। जीरादेईवाला परिवार ही मेरे पूर्वजों का परिवार है। शायद जीरादेई में आनेवाले मेरे पूर्वज मुझसे सातवी या आठवीं पीढ़ी में ऊपर थे। जो लोग जीरादेई में आए थे, वे गरीब थे और रोजगार की खोज में ही इधर आ गए थे। चूँकि उस गाँव में कोई शिक्षित नहीं था और उन दिनों भी कायस्थ तो शिक्षित हुआ ही करते थे, इसलिए गाँव के लोगों ने उनको वहाँ रख लिया

छावनी बाजार: छावनी बाजार जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। छावनी बाजार 1858 ई. के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का प्रमुख शरण स्थान रहा है। यह स्थान शहीदो के पीपल के वृक्ष के लिए भी प्रसिद्ध है। इसी जगह पर ब्रिटिश सरकार ने जनरल फोर्ट की मृत्यु के पश्चात् कार्रवाई में 500 जवानों को फांसी पर लटका दिया था।

संत रविदास वन विहार: संत रविदास वन विहार (राष्ट्रीय वन चेतना केन्द्र) कुआनो नदी के तट पर स्थित है। यह वन विहार जिला मुख्यालय से केवल एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित गणेशपुर गांव के मार्ग पर है। यहां पर एक आकर्षक बाल उद्यान और झील स्थित है। इस बाल उद्यान और झील की स्थापना सरकार द्वार पिकनिक स्थल के रूप में की गई है। वन विहार के दोनों तरफ से कुवाना नदी का स्पर्श इस जगह की खूबसूरती को और अधिक बढ़ा देता है। संत रविदास वन विहार स्थित झील में बोटिंग का मजा भी लिया जा सकता है। सामान्यत: अवकाश के दौरान और रविवार के दिन अन्य दिनों की तुलना में काफी भीड़ रहती है।

भदेश्वर नाथ: यह कुआनो नदी के तट पर, जिला मुख्यालय से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भद्रेश्‍वर नाथ भगवान शिव को समर्पित मंदिर है। माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना रावण ने की थी। प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है। काफी संख्या में लोग इस मेले में सम्मिलित होते है।

मखौडा: मखौडा जिला मुख्यालय के पश्चिम में लगभग 57 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान रामायण काल से ही काफी प्रसिद्ध है। राजा दशरथ ने इस जगह पर पुत्रेस्ठी यज्ञ किया था। जिससे भगवन राम के उदभव का कारण स्थल यही स्थान कहा जाता है। मखौडा कौशल महाजनपद का एक हिस्सा था।

श्रंगीनारी: अयोध्या धाम से लगभग 30 किमी की दूरी पर स्थित ऋषि श्रंगी का आश्रम व तपोस्थली।

गनेशपुर: गनेशपुर बस्ती जिला का एक छोटा सा गांव है। यह पश्चिम में मुख्यालय से सिर्फ 4 किलोमीटर दूर और कुआनो नदी के तट पर स्थित है। यह पुराने मूल के पिंडारियो के उत्पत्ति का स्थान है।

बेहिल नाथ मंदिर: बनकटी विकास खंड के बस्ती शहर से सोलहवें किमी पर स्थित बेहिलनाथ मंदिर प्राचीन कालीन है। कहा जाता है कि यह बौद्ध काल का मंदिर है। अष्टकोणीय अर्घा में स्थापित शिवलिंग अपने आप में अनूठा है। इस स्थान पर प्राचीन टीले हैं जिनकी खुदाई हो तो यहां का संपन्न इतिहास के बारे में पता चलेगा।

थालेश्वरनाथ मंदिर: बनकटी से तीन किलोमीटर उत्तर थाल्हापार गांव में स्थित यह मंदिर प्राचीन कालीन है। गांव से पंद्रह मीटर ऊचाई पर स्थित यह मंदिर पर्यटन विभाग की सूची में दर्ज है तथा यहां पर्यटकों के ठहरने के लिए सरकार की ओर से चार कमरे भी बनाए गए हैं।

लोढ़वा बाबा शिवमंदिर : भानपुर तहसील के बडोखर बाजार में स्थित इस मंदिर पर शिवरात्रि के दिन विशाल मेला लगता है।

कणर मंदिर: बस्ती चीनी मिल के पार्श्व में स्थित यह शिवमंदिर भी प्राचीनतम मंदिरों में शुमार है

बैड़ा वाली माता का मंदिर: - यह मंदिर भानपुर तहसील से सोनहा मार्ग की तरफ १.५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । यह समय माता का मंदिर है, यहाँ हर मंगलवार के दिन अधिक मात्रा में भक्तो की भीड़ लगती है।

धिरौली बाबू : धिरौली बाबू बस्ती जिले का एक एतिहासिक गांव है। यह मुख्यालय से पश्चिम में छावनी बाजार से सिर्फ ६ किलोमीटर दूर और अमोढ़ा रियासत से 4 किमी दूर घाघरा नदी के तट पर स्थित है। घिरौलीबाबू निवासी कुलवंत सिंह, हरिपाल सिंह, बलवीर सिह, रिसाल सिंह, रघुवीर सिंह, सुखवंत सिह, रामदीन सिंह रामगढ़ गांव में अंग्रेजों का मुकाबला करने की रणनीति बनाने के लिए 17 अप्रैल 1858 को बुलायी गयी बैठक में शामिल थे। इन सभी को अंग्रेज सेना ने पकड़ के छावनी के पीपल के वृक्ष पर फासी पे लटका दिया। घिरौलीबाबू के क्रांतिकारियों ने घाघरा नदी में नौसेना का निरीक्षण करने आये अंग्रेज अफसर को पकड़ के मार दिया था किन्तु उसकी पत्नी को छोड़ दिया, जिसकी सुचना मिलते ही गोरखपुर के जिलाधिकारी ने पूरे ग्राम को जला देने और भूमि जब्त करने का ऑर्डर दे दिया। आज भी धिरौली बाबू में कुलवंत सिंह एवम रिसाल सिंह के वंशज रणजीत सिंह, कृष्ण कुमार सिंह एवम हरिपाल सिंह एवं रामदीन सिंह के वंशज रहते है।

सरघाट मंदिर: यह मंदिर रुधौली तहसील के बगल में स्थित समय माता का मंदिर है। यहाँ हर सोमवार को अधिक मात्रा में भीड़ होती है।

केवाड़ी मुस्तहकम: बस्ती जिले से 29 किलोमीटर दूर रामजानकी रास्ते पर स्थित यह छोटा सा गाँव चिलमा बाज़ार के बगल में स्थित है। यह गाँव अध्यापकों की मातृभूमि कही जाती है। जिसको शुरुआत श्री रामदास चौधरी ने भटपुरवा इंटर कॉलेज की स्थापना 1963 में की और उनके इस शुभ कार्य को सफलता की उचाइयों पर श्री शिव पल्टन चौधरी ने बखूबी पहुँचाया |

नगर बाजार: जिला मुख्यालय से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित नगर एक छोटा सा गांव है। नगर गांव की पश्चिम दिशा में विशाल झील चंदू तल स्थित है। यह मछली पकड़ने और निशानेबाज़ी करने के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा यह गांव गौतम बुद्ध के जन्म स्थल के रूप में भी जाना जाता है। चौदहवीं शताब्दी में यह स्थान गौतम राजाओं का जिला मुख्यालय बन गया था। उस समय का प्राचीन दुर्ग आज भी यहां देखा जा सकता है। जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके पूर्व में चन्दो ताल है

अगौना: अगुना जिला मुख्यालय मार्ग में राम जानकी मार्ग पर बसा हुआ है। अगुना प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार श्री राम चन्द्र शुक्ल की जन्म भूमि है।

बराह छतर:

बराह छतर ज़िला मुख्यालय से पश्चिम में लगभग 15 किमी की दूरी पर कुवांना नदी के तट पर स्थित है। यह जगह मुख्य रूप से बराह मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। बराहक्षेत्र लोकप्रिय पौराणिक पुस्तकों में वियाग्रपुरी रूप में जाना जाता है। इसके अलावा बराह को भगवान शिव की नगरी के नाम से भी जाना जाता है।यह भदना गाँव के निकट कुआनो नदी के पश्चिम तट पर स्थित है।यह पौरोणिक क्षेत्र अजगैवा जंगल ग्रामसभा के अंतर्गत आता है।

चंदो ताल: चंदो ताल जिला मुख्यालय से आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। माना जाता है कि प्राचीन समय में इस जगह को चन्द्र नगर के नाम से जाना जाता था। कुछ समय पश्चात् यह जगह प्राकृतिक रूप से एक झील के रूप में बदल गई और इस जगह को चंदो ताल के नाम से जाना जाने लगा। यह झील पांच किलोमीटर लम्बी और चार किलोमीटर चौड़ी है। माना जाता है कि इस झील के आस-पास की जगह से मछुवारों व कुछ अन्य लोगों को प्राचीन समय के धातु के बने आभूषण और ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त हुए थे। इसके अलावा इस झील में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पक्षियों की अनेक प्रजातियां भी देखी जा सकती है। ये ताल नगर बाजार से पूर्व में सेमरा चींगन गांव तक पहुंचा हुआ है

पकरी भीखी: यह गांव गर्ग जातियों का एक समूह है, जिनसे पाँच गांव का उदय हुआ - पकरी भीखी, जिनवा, बाँसापार, पचानू, आमा। पकरी भीखी का नाम भीखी बाबा के नाम का अंश है। बस्ती जिले से १५ किलोमीटर कि दूरी पर उत्तर दिशा में नेपाल बार्डर को जाने वाली सड़क पर स्थित है। एक तरफ से तालाब और दूसरी तरफ दूर तक फैले हुए खेत।

महादेवा मंदिर : बस्ती जिले से 20 किलोमीटर पश्चिम दिशा में कुवानो नदी के घाट पार एक विशाल बरगद के निचे महादेव का मंदिर है। प्रति वर्ष शिवरात्रि के पावन पर्व पर विशाल मेला लगता है। इस दिन चारो तरफ से बहुत से लोग अपनी मनोकामना के साथ महादेव का दर्शन करते है। इस मंदिर का इतिहास बहुत ही पुराना है। किवदन्ती है कि देवरहाबाबा बाबा का कुछ दिनों तक यहाँ धर्मस्थली रही है।

शिक्षा
2001 के रूप में, साक्षरता दर 1991 में 35.36% से 54.28% की वृद्धि हुई है। साक्षरता दर पुरुषों के लिए 68.16% (1991 में 50.93% से बढ़ी हुई) और 39.००% प्रतिशत महिलाओं के लिए (1991 में 18.08% से बढ़ गया)। बस्ती शिक्षा और औद्योगिक में उत्तर प्रदेश के पिछड़े जिले में है।

भाषा एवं बोली

बस्ती जनपद की प्रमुख भाषा हिन्दी के साथ साथ भोजपुरी और अवधी भी है, जिले के पूर्वी क्षेत्रों में भोजपुरी और पश्चिमी क्षेत्रों में अवधी का प्रयोग किया जाता है। इसके साथ ही दक्षिणी और उत्तरी क्षेत्र में भोजपुरी और अवधी भी बोली जाती है।.


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